मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Saturday, November 29, 2014
जाने क्यूँ !!!...................सदा
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शब्दों की चहलकदमी से आहटें आती रहीं सन्नाटे को चीरता एक शोर कह जाता कितना कुछ मौन ही ! बिल्कुल वैसे ही मेरी खामोशियाँ ...
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अबला नहीं ये है सबला.........जयश्री कुदाल
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यूं तो आई तूफान-सी बाधाएं आई सुनामी-सी मुश्किलें तोड़ने को मेरे सपनों का घरौंदा पर मैं न हारी न टूटी न मैं किस्मत से रूठी न मैं...
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Friday, November 28, 2014
मैं अनाथ हूँ तो क्या.........वन्दना गुप्ता
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मैं अनाथ हूँ तो क्या मुझे न मिलेगा प्यार कभी किसी की आँख का तारा कभी क्या कभी बन पाऊँगा किसी के घर के आँगन में फूल बनकर महकू...
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प्रेम और स्पर्श..............अमिता प्रजापति
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प्रेम और स्पर्श मेरे दो बच्चे हैं स्पर्श कुछ अधिक चंचल है दौड़ता है दूर-दूर तक पूछ-पूछ कर परेशान रखता है दूसरा- प्रेम, जरा गम्भीर ह...
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Thursday, November 27, 2014
आग ठंडी हुई इक ज़माने के बाद..........खुमार बाराबंकवी
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वो सवा याद आये भुलाने के बाद जिंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बाद दिल सुलगता रहा आशियाने के बाद आग ठंडी हुई इक ज़माने के बाद रौशनी के लिए...
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Wednesday, November 26, 2014
सब जीवन बीत जाता है....जयशंकर प्रसाद
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सब जीवन बीत जाता है धूप छांह को खेल सदृश सब जीवन बीत जाता है समय भागता प्रतिक्षण में नव-अतीत के तुषार कण में हमें लगाकर भविष्य-...
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Tuesday, November 25, 2014
पाँच क्षणिकाएँ............. डॉ. रमा द्विवेदी
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1. अनुभूति बोध सदियाँ गुज़र जाती हैं अनुभूति का बोध उगने के लिए शताब्दियाँ गुज़र जाती हैं अनुभूति को पगने के लिए अनुभ...
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