मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Thursday, May 29, 2014
सही बात कहने के सुख के अपने कतरे हैं.......यश मालवीय
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लोग भी अपने सिमटेपन में बिखरे-बिखरे हैं राजमार्ग भी,पगडण्डी से ज्यादा संकरे हैं। हर उपसर्ग हाथ मलता है, प्रत्यय झूठे हैं पता नहीं औषधियो...
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Saturday, May 24, 2014
उल्लू हम हैं.............मोनालिसा मुखर्जी
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मायाजाल हुए तो? कभी सोचती हूँ ये सब छल ही हुए तो? मृत्योपरान्त के प्रलोभन कहीं निराधार हुए तो? स्वर्ग, नर्क, मोक्ष ही स्वयं माय...
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तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा।...........स्पन्दन
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एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोजाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वह...
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Sunday, May 18, 2014
रात ढले तक चलना होगा अनजाने फुटपाथों पर........नसीम आलम नारवी
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माना आज अंधेरों में हैं काशाने फुटपाथों पर। कल का सबेरा लायेगा सूरज चमकाने फुटपाथों पर।। नया सबेरा जगमग करती शाहराह दिखलायेगा, रा...
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Thursday, May 15, 2014
थक गया हर शब्द.........तारादत्त निर्विरोध
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थक गया हर शब्द अपनी यात्रा में, आँकड़ों को जोड़ता दिन दफ़्तरों तक रह गया। मन किसी अंधे कुएँ में खोजने को जल कागज़़ों में फि...
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Monday, May 5, 2014
केवल प्रवाहित होती है............नीरज मनजीत
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नदी..... शिला खण्डों पर बहता नदी का उद्दाम यौवन नहीं है नदी की जय-गाथा और न ही किनारों से बंधा शांत प्रवाह पराजय की शिथिल ...
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Sunday, May 4, 2014
"दसवाँ ग्रह".............यशोदा
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"हँसी में है,,, दुनिया को जोड़ने की माद्दा !!" आज विश्व हास्य दिवस है.. विश्व दिवस के रूप में प्रथम आयोजन 11जनवरी,1998 मे...
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