मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Saturday, June 1, 2013
गर बेटियों का कत्ल यूँ ही कोख में होता रहेगा.........डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ’अरुण’
›
गर बेटियों का कत्ल यूँ ही कोख में होता रहेगा! शर्तिया इन्सान अपनी पहचान भी खोता रहेगा!! मर जायेंगे अहसास सारे खोखली होगी हँसी, साँ...
10 comments:
Friday, May 31, 2013
सिसकते आब में किस की सदा है......... डॉ. बशीर बद्र
›
सिसकते आब में किस की सदा है कोई दरिया की तह में रो रहा है सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा ख़ुदा चारो तरफ़ बिखरा हुआ ...
7 comments:
Thursday, May 30, 2013
औरतों के जिस्म पर सब मर्द बने हैं......रवि कुमार
›
औरतों के जिस्म पर सब मर्द बने हैं मर्दों की जहाँ बात हो, नामर्द खड़े हैं शेरों से खेलने को पैदा हुए थे जो वो किसी के नाज़ुक़ बदन ...
11 comments:
कोई काँटा चुभा नहीं होता.................बशीर बद्र
›
कोई काँटा चुभा नहीं होता दिल अगर फूल सा नहीं होता कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता गुफ़्तगू उन से रोज...
12 comments:
Wednesday, May 29, 2013
तपती गरमी जेठ मास में....................ज्योति खरे
›
अनजाने ही मिले अचानक एक दोपहरी जेठ मास में खड़े रहे हम बरगद नीचे तपती गरमी जेठ मास में----- प्यास प्यार...
7 comments:
अच्छा पाठक बनना भी एक कला..............अफ्रीकी लेखक बेन ओकरी की राय
›
'अच्छा लेखक बनने की पहली शर्त है अच्छा पाठक बनना। लेखन की कला के साथ ही पढ़ने की कला भी विकसित की जानी चाहिए ताकि हम और बुद्धिमत...
2 comments:
Tuesday, May 28, 2013
लो चल बसा.................रमेश दत्त शर्मा
›
मुद्दत से था इंतजार, लो चल बसा। यारो तुम्हारा यार, लो चल बसा।। ख़ाली पेट ही खाता रहा धोखे। कितना था होशियार, ...
9 comments:
‹
›
Home
View web version