मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
Friday, December 30, 2011
चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न फेंक............कुंवर बेचैन
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दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न फेंक हो सके तो चल किसी की आरजू के साथ-साथ मुस्करा...
स्वाति बूँद उपहार को पाकर प्रणित करो अनमोल सा मोती ... . . . . . .. मुकेश ठन्ना
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..कभी नहीं तुम अपने मृगनयनो में मेरी छवि बसाना , . रस गुलाब से अपने होठों पे ना मेरा नाम सजाना ,, . चाहे अपने बदन की खुशबु...
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Wednesday, December 28, 2011
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ ................कातिल सैफ़ी
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अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ कोई आँसू तेरे दामन पर गिराकर बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ थक गया मैं करत...
नयी तान और ताल जुड़ेगी.......................मुकेश ठन्ना
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मीठे से एक गीत का टुकड़ा आया मन के द्वारे विस्मय से अपलक वो मन को देखे और पुकारे,, में दिखता हु चाँद का टुकड़ा ,, एक अधूरे गीत का मुख...
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‘मीरो-ग़ालिब’ की शाइरी रखना........................चाँद शेरी
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अपने जीवन में सादगी रखना आदमियत की शान भी रखना डस न ले आस्तीं के सांप कहीं इन से महफ़ूज़ ज़िंदगी रखना हों खुले दिल तो कुछ नहीं मुश्किल ...
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Friday, December 23, 2011
हुस्न ओ शबाब धोका है ........................आदिल रशीद तिलहरी
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ये चन्द रोज़ का हुस्न ओ शबाब धोका है सदाबहार हैं कांटे गुलाब धोका है मिटी न याद तेरी बल्कि और बढती गई शराब पी के ये जाना शराब धोका है ...
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Tuesday, December 20, 2011
कुछ न हासिल हुआ..............ग़ज़ल संग्रह "कुंवर कसुमेश"
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एक पुस्तक की समीक्षा पढ़ रही थी............. उसी समय मेरे मित्र भाई कुंवर कुसुमेश के ग़ज़ल संग्रह के कुछ अंश पढ़े................अपने आप क...
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